Tuesday, April 14, 2015

मां दुर्गा के प्रसिद्ध मंदिर

धार्मिक स्थल:  मां दुर्गा के प्रसिद्ध मंदिर


देवी भागवत पुराण में 108, कालिकापुराण में 26, शिवचरित्र में 51, दुर्गा सप्तशती और तंत्रचूड़ामणि में शक्ति पीठों की संख्या 52 बताई गई है। साधारत: 51 शक्ति पीठ माने जाते हैं।  वर्तमान में मां दुर्गा के प्रसिद्ध मंदि‍रों की जानकारी।
*  मां वैष्णोदेवी

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भारतीय राज्य जम्मू और कश्मीर के जम्मू के पास कटरा से माता वैष्णोदेवी के दर्शनार्थ यात्रा शुरू होती है। कटरा जम्मू से 50 किलोमीटर दूर है। कटरा से पहाड़ी लगभग 14 किलोमीटर की पर्वतीय श्रृंखला की सबसे ऊंची चोटी पर विराजमान है मां वैष्णोदेवी। यहां देशभर से लाखों भक्त दर्शन के लिए आते हैं।
 
*  मनसा देवी
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भारतीय राज्य उत्तरप्रदेश के हरिद्वार शहर में शक्ति त्रिकोण है। इसके एक कोने पर नील पर्वत पर स्थित भगवती देवी चंडी का प्रसिद्ध स्थान है। दूसरे पर दक्षेश्वर स्थान वाली पार्वती। कहते हैं कि यहीं पर सती योग अग्नि में भस्म हुई थीं और तीसरे पर बिल्वपर्वतवासिनी मनसा देवी विराजमान हैं। 
मनसा देवी को दुर्गा माता का ही रूप माना जाता है। शिवालिक पहाड़ पर स्थित इस मंदिर पर देश-विदेश से हजारों भक्त आकर पूजा-अर्चना करते हैं। यह मंदिर बहुत जागृत है।

*  पावागढ़-काली माता 

 
 


गुजरात की प्राचीन राजधानी चंपारण के पास वडोदरा शहर से लगभग 50 किलोमीटर दूर पावागढ़ की पहाड़ी की चोटी पर स्थित है मां काली का मंदिर। काली माता का यह प्रसिद्ध मंदिर मां के शक्तिपीठों में से एक है। माना जाता है कि पावागढ़ में मां के वक्षस्थल गिरे थे।
*  नयना देवी 


कुमाऊं क्षेत्र के नैनीताल की सुरम्य घाटियों में पर्वत पर एक बड़ी-सी झील त्रिऋषिसरोवर अर्थात अत्रि, पुलस्त्य तथा पुलह की साधना स्थली के समीप मल्लीताल वाले किनारे पर नयना देवी का भव्य मंदिर है। प्राचीन मंदिर तो पहाड़ के फूटने से दब गया, लेकिन उसी के पास स्थित है यह मंदिर।
*  शारदा मैया



भारतीय राज्य मैहर (मैयर) नगर की पहाड़ी पर माता शारदा का प्राचीन मंदिर है जिसे आला और उदल की इष्टदेवी कहा जाता है। यह मंदिर बहुत जागृत एवं चमत्कारिक माना जाता है। कहते हैं कि रात को आला-उदल आकर माता की आरती करते हैं, जिसकी आवाज ‍नीचे तक सुनाई देती है।
*  दाक्षायनी (मानस)

तिब्बत स्थित कैलाश मानसरोवर के मानसा के निकट एक पाषाण शिला पर माता का दायां हाथ गिरा था। यहीं पर माता साक्षात विराजमान हैं। यह माता दाक्षायनी का मुख्य स्थान है।
*  कालका माता

 

भारतीय राज्य बंगाल के कोलकाता शहर के हावड़ा स्टेशन से पांच मील दूर भागीरथी के आदि स्रोत पर कालीघाट नामक स्थान पर कालका जी का मंदिर है। रामकृष्ण परमहंस यहीं पर साधना करते थे। यह बहुत ही जागृत शक्तिपीठ है।
*  ज्वालामुखी







कांगडा तस्वीरें, ज्वालामुखी मंदिर - पूजा करते लोग 








भारत के हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में जहां माता की जीभ गिरी थी उसे ज्वाला जी स्थान कहते हैं। इस स्थान से आदिकाल से ही पृथ्वी के भीतर से कई अग्निशिखाएं निकल रही हैं। यह बहुत ही जागृत स्थान है।
*  भवानी माता
 


महाराष्ट्र के पूना में भगवती के दो मंदिर हैं पहला पार्वती का प्रसिद्ध मंदिर, दूसरा प्रतापगढ़ नामक स्थान पर भगवती भवानी का मंदिर। भवानी माता छत्रपति शिवाजी महाराज की इष्टदेवी हैं।
*  तुलजा भवानी
 
महाराष्ट्र के उस्मानाबाद जिले में स्थित है तुलजापुर। एक ऐसा स्थान जहां छत्रपति शिवाजी की कुलदेवी मां तुलजा भवानी स्थापित हैं, जो आज भी महाराष्ट्र व अन्य राज्यों के कई निवासियों की कुलदेवी के रूप में प्रचलित हैं। तुलजा माता का यह प्रमुख मंदिर है। इंदौर के पास देवास की टेकरी पर भी तुलजा भवानी का प्रसिद्ध मंदिर है।
*  मां चामुंडा देवी
 
चामुंडा माता के मंदिर कई हैं किंतु हिमाचल के धर्मशाला से 15 किमी पर स्थित बंकर नदी के किनारे बहुत ही प्राचीन मंदिर स्थित है। इसके अलावा राजस्थान में जोधपुर के मेहरानगढ़ किले पर स्थित चामुंडा माता का मंदिर भी प्रख्यात है। इंदौर के पास देवास की पहाड़ी पर भी मां चामुंडा का प्रसिद्ध मंदिर है।

*  अम्बाजी मंदिर 
 
गुजरात का अम्बाजी मंदिर बहुत ही प्रसिद्ध है। अम्बाजी मंदिर गुजरात और राजस्थान की सीमा से लगा हुआ है। माउंट आबू से 45 किलोमीटर दूरी पर स्थित है अम्बा माता का मंदिर, जहां लाखों भक्त आते हैं।



*  अर्बुदा देवी

 
भारतीय राज्य राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित नीलगिरि की पहाड़ियों की सबसे ऊंची चोटी पर बसे माउंट आबू पर्वत पर स्थित अर्बुदा देवी के मंदिर को 51 प्रधान शक्ति पीठों में गिना जाता है।

*  देवास माता टेकरी

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मध्यप्रदेश के इंदौर शहर के पास स्थित जिला देवास की टेकरी पर स्थित मां भवानी का यह मंदिर काफी प्रसिद्ध है। लोक मान्यता है कि यहां देवी मां के दो स्वरूप अपनी जागृत अवस्था में हैं। इन दोनों स्वरूपों को छोटी मां और बड़ी मां के नाम से जाना जाता है। बड़ी मां को तुलजा भवानी और छोटी मां को चामुण्डा देवी का स्वरूप माना गया है।
*  बिजासन टेकरी



मध्यप्रदेश की व्यावसायिक नगरी इंदौर में बिजासन माता की प्रसिद्धि भी दूर-दूर तक है। वैष्णोदेवी की मूर्तियों के समान यहां भी मां की पाषाण पिंडियां हैं। यह मंदिर इंदौर एयरपोर्ट से कुछ ही दूरी पर स्थित है।
 
*  गढ़ कालिका और हरसिद्धि
गढ़कालिका मंदिर

भारत के मध्यप्रदेश राज्य के नगर उज्जैन में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के समीप शिप्रा नदी के तट पर हरसिद्धि माता का मंदिर है, जो राजा विक्रमादित्य की कुलदेवी हैं। उज्जैन के कालीघाट स्थित कालिका माता का यहां बहुत ही प्राचीन मंदिर है, जिसे गढ़ कालिका के नाम से जाना जाता है। इसे कालिदास की इष्टदेवी माना जाता है।
*  मुम्बा देवी


महाराष्ट्र के प्रमुख महानगर मुंबई की मुम्बा देवी, कालबा देवी और महालक्ष्मी का मंदिर प्रसिद्ध है। महालक्ष्मी का मंदिर समुद्र तट पर, मुम्बा देवी के समीप तालाब है और कालबा देवी का मंदिर अति प्राचीन माना जाता है।
*  सप्तश्रृंगी देवी

 

सप्तश्रृंगी देवी नासिक से करीब 65 किलोमीटर की दूरी पर 4800 फुट ऊंचे सप्तश्रृंग पर्वत पर विराजित हैं। सह्याद्री की पर्वत श्रृंखला के सात शिखर का प्रदेश यानी सप्तश्रृंग पर्वत, जहां एक तरफ गहरी खाई और दूसरी ओर ऊंचे पहाड़ पर हरियाली है। इसे अर्धशक्तिपीठ माना जाता है।
*  मां मनु देवी



महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश राज्यों को अलग करने वाला सतपुड़ा पर्वत श्रृंखलाओं की ‍वादियों में बसा हुआ है। यहां खानदेशवासियों की श्रीक्षेत्र कुलदेवी मनु देवी का मंदिर। भुसावल से यावल 20 किमी की दूरी पर है। यावल से कुछ ही दूर आड़गाव में मनु देवी का स्थान है।
*  त्रिशक्ति पीठम्
श्रीकाली माता अमरावती देवस्थानम्। इस पवित्र स्थान को त्रिशक्ति पीठम् के नाम से भी जाना जाता है। आंध्रप्रदेश के विजयवाड़ा के गिने-चुने मंदिरों में से एक कृष्णावेणी नदी के तट पर बसा यह पवित्र मंदिर बेहद अलौकिक है।

*  आट्टुकाल भगवती



केरल के तिरुवनंतपुरम शहर में स्थित आट्टुकाल भगवती मंदिर की प्रसिद्धि पूरे दक्षिण भारत में है। पराशक्ति जगदम्बा केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम शहर की दक्षिण-पूर्व दिशा में आट्टुकाल नामक गांव में भक्तजनों को मंगल आशीष देते हुए विराजती हैं।
*  श्रीलयराई देवी
गोवा प्रांत के गांव में श्रीलयराई देवी का स्थान बहुत ही प्राचीन और प्रसिद्ध है। नवरात्रि में यहां पूरे गांव के लोग अंगारे पर बहुत ही सहजता से चलते हैं और उन्हें कुछ नहीं होता।
*  कामाख्या


 


 
भारतीय राज्य असम में गुवाहाटी से दो मिल दूर पश्चिम में ‍नीलगिरि पर्वत पर स्थित सिद्धि पीठ को कामाख्या या कामाक्षा पीठ कहते हैं। कालिका पुराण में इसका उल्लेख मिलता है।

 
*  विंध्याचल



कंस के हाथ से छूट कर जिन्होंने भविष्यवाणी की थी वही श्री विंध्यावासिनी हैं। यहीं पर भगवती ने शुंभ और निशुंभ को मारा था। इस क्षेत्र में शक्ति त्रिकोण है। क्रमश: विंध्यवासिनी (महालक्ष्मी), कालीखोह की काली (महाकाली) तथा पर्वत पर की अष्टभुजा (महासरस्वती) विराजमान हैं।

*  तारादेवी

 तारा देवी मन्दिर


यह प्रदेश भी एक प्रसिद्ध शक्ति स्थल है। तारादेवी नामक स्टेशन के पास तारा का प्राचीन स्थान है और कण्डाघाट स्टेशन के पास ही देवी का प्राचीन मंदिर है।

*  गुह्म कालिका

नेपाल के काठमांडू स्थित पशुपतिनाथ मंदिर से कुछ ही दूर स्थित वागमती नदी के गुह्मेश्वरी घाट पर माता गुह्मेश्वरी का मंदिर है। नेपाल के राजा की कुलदेवी माता के दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।
*  महाकाली
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काशी में शक्ति का त्रिकोण है उसके कोनों पर क्रमश: दुर्गाजी (महाकाली), महालक्ष्मी तथा वागीश्वरी (महासरस्वती) विराजमान हैं। काशीक्षेत्र स्थित इसी स्थान को शक्तिपीठ कहा जाता है।
*  कौशिकी देवी


भारत के उत्तरांचल राज्य में काषाय पर्वत पर स्थित अल्मोड़ा नगर से आठ मील दूर कौशिकी देवी का स्थान है। दुर्गा सप्तशती के पांचवें अध्याय में इसका उल्लेख मिलता है।
*  सातमात्रा
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर से तीन मील पूर्व में नर्मदा के तट पर महत्वपूर्ण 'सातमात्रा' शक्तिपीठ स्‍थित है, जिसे सप्तमात्रा भी कहा जाता है। दुर्गा सप्तशती में इसकी उत्पत्ति के बारे में उल्लेख मिलता है।

*  कालका
देहली-शिमला रोड पर कालका नामक जंक्शन है। यहीं पर भगवती कालिका का प्रा‍चीन मंदिर है। दुर्गा सप्तशती में इसका उल्लेख मिलता है।
*  नगरकोट की देवी
कांगड़ा पठानकोट-योगीन्द्र नगर लाइन पर एक स्टेशन है। यहां भगवती विद्येश्वरी का बहुत ही प्राचीन मंदिर है। इसको नगरकोट की देवी भी कहते हैं।
*  चित्तौड़
चित्तौड़ के दुर्ग के अंदर भगवती कालिका का प्राचीन मंदिर है। दुर्ग में तुलजा भवानी तथा अन्नपूर्णा के मंदिर भी हैं।
*  भगवती पटेश्वरी
भगवती पटेश्वरी मंदिर की स्थापना महाभारत काल में राजा कर्ण द्वारा हुई थी। सम्राट विक्रमादित्य ने इसका जीर्णोद्धार किया था। यह नाथ सम्प्रदाय के साधुओं का स्थान है।
*  योगमाया-कालिका
यहां दो शक्तिपीठ माने गए हैं। पहला कुतुबमीनार के पास योगमाया का मंदिर और दूसरा यहां से लगभग सात मील पर ओखला नामक ग्राम में कालिका का मंदिर है।
*  पठानकोट
पठानकोट का प्राचीन नाम पथकोट था, क्योंकि यहां प्राचीनकाल से ही बड़ी-बड़ी सड़कें थीं। यहीं पर जो कोट अर्थात किला है वहीं पथकोट की देवी (पठानकोट की देवी) का स्थान है। त्रिगर्त पर्वतीय क्षेत्र में इस देवी की आराधना प्राचीनकाल से ही होती आ रही है।
*  ललिता देवीnaimisharanya23_310












इलाहाबाद के कड़ा नामक स्थान पर कड़े की देवी विशेष रूप से प्रसिद्ध है। इसके अलावा संगम तट पर ललिता देवी का प्रसिद्ध शक्तिपीठ है।
*  पूर्णागिरि
पुण्यागिरि या पूर्णागिरि स्थान अल्मोड़ा जिले के पीलीभीत मार्ग पर टनकपुर से आठ सौ मील पर नेपाल की सरहद पर शारदा नदी के किनारे है। आसपास जंगल और बीच में पर्वत पर विराजमान हैं भगवती दुर्गा। इसे शक्तिपीठों में गिना जाता है।
*  माता कुडि़या
मद्रास (चेन्नई) नगर के साहूकार पेठ में सुप्रसिद्ध माता कुडि़या का मंदिर है। यहां कंडे की आंच से मीठा चावल पका कर देवी को भोग लगाया जाता है।
*  देवी चामुंडा
 
मैसूर की अधिष्ठात्री देवी चामुंडा हैं। मैसूर से लगी विशाल पहाड़ियों पर माता का स्थान है। चामुंडा को यहां भेरुण्डा भी कहते हैं।


Sunday, April 12, 2015

माता के शक्तिपीठ




माता के शक्तिपीठ



!!माता के 51 शक्ति पीठ!!

देवी भागवत पुराण में 108, कालिकापुराण में छब्बीस,
शिवचरित्र में इक्यावन, दुर्गा शप्तसती और तंत्रचूड़ामणि में
शक्ति पीठों की संख्या 52 बताई गई है।

साधारत: 51 शक्ति पीठ माने जाते हैं। तंत्रचूड़ामणि में लगभग 52
शक्ति पीठों के बारे में बताया गया है। प्रस्तुत है

तंत्रचूड़ामणि की तालिका।

1.हिंगलाज
हिंगुला या हिंगलाज शक्तिपीठ जो कराची से 125
किमी उत्तर पूर्व में स्थित है, जहाँ माता का ब्रह्मरंध (सिर)
गिरा था। इसकी शक्ति- कोटरी (भैरवी-
कोट्टवीशा) है और भैरव को भीमलोचन कहते हैं।

2.शर्कररे (करवीर)
पाकिस्तान में कराची के सुक्कर स्टेशन के निकट स्थित है शर्कररे
शक्तिपीठ, जहाँ माता की आँख
गिरी थी। इसकी शक्ति-
महिषासुरमर्दिनी और भैरव को क्रोधिश कहते हैं।

3.सुगंधा- सुनंदा
बांग्लादेश के शिकारपुर में बरिसल से 20 किमी दूर सोंध
नदी के किनारे स्थित है माँ सुगंध,
जहाँ माता की नासिका गिरी थी।
इसकी शक्ति है सुनंदा और भैरव को त्र्यंबक कहते हैं।

4.कश्मीर- महामाया
भारत के कश्मीर में पहलगाँव के निकट माता का कंठ गिरा था।
इसकी शक्ति है महामाया और भैरव को त्रिसंध्येश्वर कहते हैं।

5.ज्वालामुखी- सिद्धिदा (अंबिका)
भारत के हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में माता की जीभ
गिरी थी, उसे ज्वालाजी स्थान कहते
हैं। इसकी शक्ति है सिद्धिदा (अंबिका) और भैरव को उन्मत्त कहते हैं।

6.जालंधर- त्रिपुरमालिनी
पंजाब के जालंधर में छावनी स्टेशन के निकट
देवी तलाब जहाँ माता का बायाँ वक्ष (स्तन) गिरा था।
इसकी शक्ति है त्रिपुरमालिनी और भैरव को भीषण कहते हैं।

7.वैद्यनाथ- जयदुर्गा
झारखंड के देवघर में स्थित वैद्यनाथधाम जहाँ माता का हृदय गिरा था। इसकी शक्ति है जय दुर्गा और भैरव को वैद्यनाथ कहते हैं।

8.नेपाल- महामाया
नेपाल में पशुपतिनाथ मंदिर के निकट स्थित है गुजरेश्वरी मंदिर
जहाँ माता के दोनों घुटने (जानु) गिरे थे। इसकी शक्ति है
महशिरा (महामाया) और भैरव को कपाली कहते हैं।

9.मानस- दाक्षायणी
तिब्बत स्थित कैलाश मानसरोवर के मानसा के निकट एक पाषाण शिला पर
माता का दायाँ हाथ गिरा था। इसकी शक्ति है
दाक्षायनी और भैरव अमर हैं।

10.विरजा- विरजाक्षेत्र
भारतीय प्रदेश उड़ीसा के विराज में उत्कल स्थित
जगह पर माता की नाभि गिरी थी।
इसकी शक्ति है विमला और भैरव को जगन्नाथ कहते हैं।

11.गंडकी- गंडकी
नेपाल में गंडकी नदी के तट पर पोखरा नामक स्थान
पर स्थित मुक्तिनाथ मंदिर, जहाँ माता का मस्तक या गंडस्थल अर्थात
कनपटी गिरी थी।
इसकी शक्ति है गण्डकी चण्डी और
भैरव चक्रपाणि हैं।

12.बहुला- बहुला (चंडिका)
भारतीय प्रदेश पश्चिम बंगाल से वर्धमान जिला से 8
किमी दूर कटुआ केतुग्राम के निकट अजेय नदी तट
पर स्थित बाहुल स्थान पर माता का बायाँ हाथ गिरा था।
इसकी शक्ति है देवी बाहुला और भैरव को भीरुक कहते हैं।

13.उज्जयिनी- मांगल्य चंडिका
भारतीय प्रदेश पश्चिम बंगाल में वर्धमान जिले से 16
किमी गुस्कुर स्टेशन से उज्जयिनी नामक स्थान पर
माता की दायीं कलाई
गिरी थी। इसकी शक्ति है मंगल
चंद्रिका और भैरव को कपिलांबर कहते हैं।

14.त्रिपुरा- त्रिपुर सुंदरी
भारतीय राज्य त्रिपुरा के उदरपुर के निकट राधाकिशोरपुर गाँव के
माताबाढ़ी पर्वत शिखर पर माता का दायाँ पैर गिरा था।
इसकी शक्ति है त्रिपुर सुंदरी और भैरव को त्रिपुरेश कहते हैं।

15.चट्टल - भवानी
बांग्लादेश में चिट्टागौंग (चटगाँव) जिला के सीताकुंड स्टेशन के निकट चंद्रनाथ पर्वत शिखर पर छत्राल (चट्टल या चहल) में
माता की दायीं भुजा गिरी थी।
इसकी शक्ति भवानी है और भैरव को चंद्रशेखर कहते हैं।

16.त्रिस्रोता- भ्रामरी
भारतीय राज्य पश्चिम बंगाल के जलपाइगुड़ी के बोडा मंडल के सालबाढ़ी ग्राम स्थित त्रिस्रोत स्थान पर माता का बायाँ पैर गिरा था। इसकी शक्ति है
भ्रामरी और भैरव को अंबर और भैरवेश्वर कहते हैं।

17.कामगिरि- कामाख्या
भारतीय राज्य असम के गुवाहाटी जिले के कामगिरि क्षेत्र में स्थित नीलांचल पर्वत के कामाख्या स्थान पर माता का योनि भाग गिरा था। इसकी शक्ति है कामाख्या और भैरव
को उमानंद कहते हैं।

18.प्रयाग- ललिता
भारतीय राज्य उत्तरप्रदेश के इलाहबाद शहर (प्रयाग) के संगम
तट पर माता की हाथ
की अँगुली गिरी थी।
इसकी शक्ति है ललिता और भैरव को भव कहते हैं।

19.जयंती- जयंती
बांग्लादेश के सिल्हैट जिले के जयंतीया परगना के भोरभोग गाँव कालाजोर
के खासी पर्वत पर जयंती मंदिर
जहाँ माता की बायीं जंघा गिरी थी।
इसकी शक्ति है जयंती और भैरव
को क्रमदीश्वर कहते हैं।

20.युगाद्या- भूतधात्री
पश्चिम बंगाल के वर्धमान जिले के खीरग्राम स्थित
जुगाड्या (युगाद्या) स्थान पर माता के दाएँ पैर का अँगूठा गिरा था। इसकी शक्ति है भूतधात्री और भैरव को क्षीर खंडक कहते हैं।
21.कालीपीठ- कालिका
कोलकाता के कालीघाट में माता के बाएँ पैर का अँगूठा गिरा था।
इसकी शक्ति है कालिका और भैरव को नकुशील कहते हैं।

22.किरीट- विमला (भुवनेशी)
पश्चिम बंगाल के मुर्शीदाबाद जिला के लालबाग कोर्ट रोड स्टेशन के
किरीटकोण ग्राम के पास माता का मुकुट गिरा था।
इसकी शक्ति है विमला और भैरव को संवर्त्त कहते हैं।

23.वाराणसी- विशालाक्षी
उत्तरप्रदेश के काशी में मणिकर्णिक घाट पर माता के कान के
मणिजड़ीत कुंडल गिरे थे। इसकी शक्ति है विशालाक्षी मणिकर्णी और भैरव को काल भैरव कहते हैं।

24.कन्याश्रम- सर्वाणी
कन्याश्रम में माता का पृष्ठ भाग गिरा था। इसकी शक्ति है
सर्वाणी और भैरव को निमिष कहते हैं।

25.कुरुक्षेत्र- सावित्री
हरियाणा के कुरुक्षेत्र में माता की एड़ी (गुल्फ)
गिरी थी। इसकी शक्ति है
सावित्री और भैरव है स्थाणु

26.मणिदेविक- गायत्री
अजमेर के निकट पुष्कर के मणिबन्ध स्थान के गायत्री पर्वत पर दो मणिबंध गिरे थे। इसकी शक्ति है गायत्री और
भैरव को सर्वानंद कहते हैं।

27.श्रीशैल- महालक्ष्मी
बांग्लादेश के सिल्हैट जिले के उत्तर-पूर्व में जैनपुर गाँव के पास शैल नामक स्थान
पर माता का गला (ग्रीवा) गिरा था। इसकी शक्ति है
महालक्ष्मी और भैरव को शम्बरानंद कहते हैं।

28.कांची- देवगर्भा
पश्चिम बंगाल के बीरभुम जिला के बोलारपुर स्टेशन के उत्तर पूर्व
स्थित कोपई नदी तट पर कांची नामक स्थान पर
माता की अस्थि गिरी थी।
इसकी शक्ति है देवगर्भा और भैरव को रुरु कहते हैं।

29.कालमाधव- देवी काली
मध्यप्रदेश के अमरकंटक के कालमाधव स्थित शोन नदी तट के
पास माता का बायाँ नितंब गिरा था जहाँ एक गुफा है। इसकी शक्ति है काली और भैरव को असितांग कहते हैं।

30.शोणदेश- नर्मदा (शोणाक्षी)
मध्यप्रदेश के अमरकंटक स्थित नर्मदा के उद्गम पर शोणदेश स्थान पर माता का दायाँ नितंब गिरा था। इसकी शक्ति है नर्मदा और भैरव को भद्रसेन कहते हैं।

31.रामगिरि- शिवानी
उत्तरप्रदेश के झाँसी-मणिकपुर रेलवे स्टेशन चित्रकूट के पास
रामगिरि स्थान पर माता का दायाँ वक्ष गिरा था। इसकी शक्ति है
शिवानी और भैरव को चंड कहते हैं।

32.वृंदावन- उमा
उत्तरप्रदेश के मथुरा के निकट वृंदावन के भूतेश्वर स्थान पर माता के गुच्छ औ चूड़ामणि गिरे थे। इसकी शक्ति है उमा और भैरव को भूतेश कहते हैं।

33.शुचि- नारायणी
तमिलनाडु के कन्याकुमारी-तिरुवनंतपुरम मार्ग पर
शुचितीर्थम शिव मंदिर है, जहाँ पर
माता की ऊपरी दंत (ऊर्ध्वदंत) गिरे थे। इसकी शक्ति है नारायणी और भैरव को संहार कहते हैं।

34.पंचसागर- वाराही
पंचसागर (अज्ञात स्थान) में माता की निचले दंत (अधोदंत) गिरे थे।
इसकी शक्ति है वराही और भैरव को महारुद्र कहते हैं।

35.करतोयातट- अपर्णा
बांग्लादेश के शेरपुर बागुरा स्टेशन से 28 किमी दूर
भवानीपुर गाँव के पार करतोया तट स्थान पर
माता की पायल (तल्प) गिरी थी।
इसकी शक्ति है अर्पण और भैरव को वामन कहते हैं।

36.श्रीपर्वत- श्रीसुंदरी
कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र के पर्वत पर माता के दाएँ पैर
की पायल गिरी थी।
दूसरी मान्यता अनुसार आंध्रप्रदेश के कुर्नूल जिले के
श्रीशैलम स्थान पर दक्षिण गुल्फ अर्थात दाएँ पैर
की एड़ी गिरी थी।
इसकी शक्ति है श्रीसुंदरी और भैरव
को सुंदरानंद कहते हैं।

37.विभाष- कपालिनी
पश्चिम बंगाल के जिला पूर्वी मेदिनीपुर के पास तामलुक
स्थित विभाष स्थान पर
माता की बायीं एड़ी गिरी थी।
इसकी शक्ति है कपालिनी (भीमरूप)
और भैरव को शर्वानंद कहते हैं।

38.प्रभास- चंद्रभागा
गुजरात के गीर-सोमनाथ जिले में स्थित सोमनाथ मंदिर के निकट वेरावल स्टेशन से 4 किमी प्रभास क्षेत्र में माता का उदर गिरा था।
इसकी शक्ति है चंद्रभागा और भैरव को वक्रतुंड कहते हैं।

39.भैरवपर्वत- अवंती
मध्यप्रदेश के उज्जैन नगर में शिप्रा नदी के तट के पास भैरव
पर्वत पर माता के ओष्ठ गिरे थे। इसकी शक्ति है अवंति और
भैरव को लम्बकर्ण कहते हैं।

40.जनस्थान- भ्रामरी
महाराष्ट्र के नासिक नगर स्थित
गोदावरी नदी घाटी स्थित जनस्थान पर
माता की ठोड़ी गिरी थी।
इसकी शक्ति है भ्रामरी और भैरव है विकृताक्ष।

41.सर्वशैल स्थान
आंध्रप्रदेश के राजामुंद्री क्षेत्र स्थित
गोदावरी नदी के तट पर कोटिलिंगेश्वर मंदिर के पास
सर्वशैल स्थान पर माता के वाम गंड (गाल) गिरे थे। इसकी शक्ति है
राकिनी और भैरव को वत्सनाभम कहते हैं

42.गोदावरीतीर :
यहाँ माता के दक्षिण गंड गिरे थे। इसकी शक्ति है विश्वेश्वरी और भैरव को दंडपाणि कहते हैं।

43.रत्नावली- कुमारी
बंगाल के हुगली जिले के खानाकुल-कृष्णानगर मार्ग पर
रत्नावली स्थित रत्नाकर नदी के तट पर माता का दायाँ स्कंध गिरा था। इसकी शक्ति है कुमारी और भैरव को शिव कहते हैं।

44.मिथिला- उमा (महादेवी)
भारत-नेपाल सीमा पर जनकपुर रेलवे स्टेशन के निकट मिथिला में
माता का बायाँ स्कंध गिरा था। इसकी शक्ति है उमा और भैरव
को महोदर कहते हैं।

45.नलहाटी- कालिका तारापीठ
पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले के नलहाटि स्टेशन के निकट
नलहाटी में माता के पैर
की हड्डी गिरी थी।
इसकी शक्ति है कालिका देवी और भैरव को योगेश कहते हैं।

46.कर्णाट- जयदुर्गा
कर्नाट (अज्ञात स्थान) में माता के दोनों कान गिरे थे। इसकी शक्ति है जयदुर्गा और भैरव को अभिरु कहते हैं।

47.वक्रेश्वर- महिषमर्दिनी
पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले के दुबराजपुर स्टेशन से सात
किमी दूर वक्रेश्वर में पापहर नदी के तट पर
माता का भ्रूमध्य (मन:) गिरा था। इसकी शक्ति है महिषमर्दिनी और भैरव को वक्रनाथ कहते हैं।

48.यशोर- यशोरेश्वरी
बांग्लादेश के खुलना जिला के ईश्वरीपुर के यशोर स्थान पर माता के हाथ और पैर गिरे (पाणिपद्म) थे। इसकी शक्ति है
यशोरेश्वरी और भैरव को चण्ड कहते हैं।

49.अट्टाहास- फुल्लरा
पश्चिम बंगला के लाभपुर स्टेशन से दो किमी दूर अट्टहास स्थान पर माता के ओष्ठ गिरे थे। इसकी शक्ति है फुल्लरा और भैरव
को विश्वेश कहते हैं।

50.नंदीपूर- नंदिनी
पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले के सैंथिया रेलवे स्टेशन
नंदीपुर स्थित चारदीवारी में बरगद के वृक्ष के समीप माता का गले का हार गिरा था।
इसकी शक्ति है नंदिनी और भैरव को नंदिकेश्वर कहते हैं।

51.लंका- इंद्राक्षी
श्रीलंका में